परमाणु (Atomic) संरचना का परिचय

 परमाणु (Atomic) – किसी तत्व का सूक्ष्मतम अंश जिसका रासायनिक अस्तित्व हो। इसकी संरचना नाभिक तथा इलेक्ट्रॉन से मिलकर होती है। नाभिक में न्यूट्रॉन तथा प्रोटॉन होते हैं परमाणु का आवेश शून्य होता है।

परमाणु संख्या- वह मूलभूत संख्या जो उस परमाणु के नाभिक में प्राप्य प्रोटॉनों की संख्या को बतलाती है। यह संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या के तुल्य भी होती है। इसे प्रोटॉन संख्या भी कहते हैं। संकेत Z होता है।

परमाणु भार – आजकल इसे आपेक्षिक परमाणु द्रव्यमान कहते हैं।

परमाणु द्रव्यमान संख्या- परमाणुओं के द्रव्यमान को बतलाने वाला एकक, यह C-12 परमाणु के 1/12 अर्थात् 1.66033 x 1027 किलोग्राम के परमाणुकता—किसी अणु में परमाणुओं की संख्या यथा-ऑक्सीजन (O) की तुल्य है।

परमाणुकता– किसी अणु के परमाणुओं की संख्या यथा-ऑक्सीजन O2 है। ओजोन (O3) की तीन और बेंजीन (C६H६) की बारह ।

मूलकण-मूलकणों के संयोग तथा अभिक्रिया से ही इस ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ है। परमाणु की संरचना वाले तीन कण-न्यूट्रॉन, प्रोटॉन तथा इलेक्ट्रॉन बहुत समय तक चर्चित रहे, किन्तु कुछ काल बाद चतुर्थ कण फोटॉन भी सम्मिलित हो गया। यही नहीं, धीरे-धीरे फोटॉन भी विखंडित हो गया और मेसॉन जैसे कण प्रकाश में आये। इस तरह कुछ स्थायी तथा कुछ अस्थायी कणों को मिलाकर इनकी संख्या तीस तक पहुँच चुकी है। स्थायी कण दो प्रकार के बताए गए हैं-द्रव्यमान कण तथा ऊर्जा कण। इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, प्रति-प्रोटॉन तथा पाजिट्रॉन ये चार द्रव्यमान कण हैं। 

अस्थायी कणों में न्यूट्रॉन, मेसॉन तथा वी-कण मुख्य हैं, मेसॉन दो प्रकार के हैं, (1) भारी किस्में जो न्यूक्लियानों को बाँधे रहती हैं और ब्रह्माण्ड विकिरण से उत्पन्न हैं। (2) हल्की किस्में जो भारी किस्मों के क्षय से उत्पन्न हैं। भारी मेसॉन को पाई-मेसॉन तथा हल्के मेसॉनो को न्यूमेसॉन कहते हैं। पाई मेसॉन तीन तरह के होते हैं-धन, ऋण तथा उदासीन। आविष्ट पायानों का प्रचक्रण शून्य होता है। म्यूआनों के धन तथा ऋण दो ही रूप प्राप्त होते हैं इनका भार इलेक्ट्रॉनों से 210 गुना होता है। वी-कण सर्वप्रथम 1948 में रोचेस्टर तथा बटलर द्वारा ज्ञात किए गए। ये धन, ऋण तथा दो उदासीन कणों के रूप में पाए जाते हैं। उदासीन वी-कण का भार इलेक्ट्रॉन से 2200 गुना होता है। इस तरह ये स्थायी अस्थायी कण मिलाकर मूलकण, मूलभूत कण या मौलिक कण कहलाते हैं।

परमाणु की संरचना 

 परमाणु का केन्द्रीय भाग धन आवेशित, भारी तथा दोस होता है। यह नाभिक कहलाता है। नाभिक में धन आवेशित कण प्रोटॉन तथा विद्युत उदासीन कण न्यूट्रॉन होते हैं।

नाभिक के चारों ओर ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन होते हैं। एक इलेक्ट्रॉन पर प्रोटॉन के बराबर तथा विपरीत आवेश होता है।

किसी परमाणु में प्रोटॉन तथा इलेक्ट्रॉन की संख्या समान होती है अर्थात् परमाणु उदासीन होता है। एक प्रोटॉन का द्रव्यमान लगभग 1836 इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान के बराबर होता है, जबकि प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन का द्रव्यमान समान होता है। इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर एक निश्चित ऊर्जा वाले कक्ष में चक्कर लगाते रहते हैं तथा प्रत्येक कक्षा में इलेक्ट्रॉन की अधिकतम संख्या 22 होती है जहाँ ” = कक्ष संख्या है।

कक्षा (शेल) – इलेक्ट्रॉन जिस परिपथ पर नाभिक के चारों ओर भ्रमण करते हैं तथा जिसके फलस्वरूप उनकी ऊर्जा का मान निश्चित रहता है, कक्षा कहलाते हैं। जैसे – K, L, M, N, O आदि ।

उप-कक्षा या ऑर्बिट – उप कक्षा को ही ‘ऑर्बिट’ कहा जाता है। यह वह क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की अधिकतम सम्भावना होती है। जैसे—s, p. d. f आदि । ऑर्बिटों के उपभागों को ऑर्बिटल कहा जाता है। जैसे-p ऑर्बिट में तीन ऑर्बिटल (Px Py तथा pz) होते हैं।

इलेक्ट्रॉन – इलेक्ट्रॉन एक ऐसा कण है जिसका द्रव्यमान नगण्य होता है तथा जिस ‘पर इकाई ऋण आवेश रहता है।

प्रोटॉन-प्रोटॉन एक ऐसा सूक्ष्म कण है जिसका सापेक्ष द्रव्यमान हाइड्रोजन-परमाणु के द्रव्यमान के लगभग बराबर होता है और इस पर इकाई धन-आवेश रहता है।

न्यूट्रॉन-यह उदासीन होता है, अर्थात् इस पर कोई आवेश नहीं रहता है। एक न्यूट्रॉन का द्रव्यमान एक प्रोटॉन के द्रव्यमान के बराबर होता है।

संयोजी इलेक्ट्रॉन – किसी भी परमाणु की बाह्यतम कक्षा के इलेक्ट्रॉन ‘संयोजी इलेक्ट्रॉन’ कहलाते हैं और इसकी भीतरी कक्षाओं के इलेक्ट्रॉन ‘कोर इलेक्ट्रॉन’ कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, कैल्सियम परमाणु में दो संयोजी इलेक्ट्रॉन और शेष 18 कोर इलेक्ट्रॉन हैं।

समस्थानिक– एक ही तत्व के परमाणु जिनका परमाणु द्रव्यमान भिन्न हो किन्तु परमाणु संख्या समान हो, समस्थानिक कहलाते हैं। उदाहरण- हाइड्रोजन के तीन

कस्में जो नोको समस्थानिक- एक ही तत्व के परमाणु जिनका परमाणु परमाणु संख्या समान हो, समस्थानिक कहलाते हैं। उदाहरण- हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं-

१H१ सामान्य हाइड्रोजन या प्रोटियम (परमाणु द्रव्यमान 1 ) 

२H२ ड्यूटीरियम या प्रोटियम (परमाणु द्रव्यमान 2) 

३H३ ट्रिटीयम या प्रोटियम (परमाणु द्रव्यमान 3)

नाभिकीय क्रिया- वे क्रियाएँ, जिनमें परमाणु के नाभिक में परिवर्तन होते हैं, नाभिकीय क्रियाएँ कहलाती हैं। इस क्रिया में बहुत अधिक परिमाण में ऊर्जा उत्सर्जित होती है।

समभारिक – वे तत्व जिनके परमाणु भार समान, किन्तु परमाणु-संख्याएँ भिन्न-भिन्न होती हैं, ‘समभारिक’ कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, आर्गन, पोटैशियम और कैल्सियम ये तीनों समभारिक हैं, क्योंकि इन तीनों का परमाणु भार 40 होता है, किन्तु इनकी परमाणु संख्याएँ क्रमशः 18, 19 और 20 होती हैं।

आइसोटॉन्स – विभिन्न तत्वों के ऐसे परमाणु जिनके नाभिकों में न्यूट्रॉनों की संख्या समान हो, जैसे-14Se 30, 15 P31 तथा 16S 32 प्रत्येक परमाणु के नाभिक में 16 न्यूट्रॉन हैं।

क्वार्क (Quark)-पदार्थ के मूल कणों को बनाने वाले कणों को क्वार्क नाम दिया गया है। अभी तक क्वार्क एक काल्पनिक कण है। कुछ वैज्ञानिकों का मत है कि क्वार्क का अस्तित्व है और क्वार्कों के मिलने से दूसरे कण बनते हैं। क्वार्क कणों पर आंशिक आवेश होता है। इनके अस्तित्व के विषय में सर्वप्रथम अमरीका के भौतिकशास्त्रियों मुरेगेलमान और जॉर्ज ज्वीग ने 1964 में कल्पना की थी।

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