पृथ्वी पर मानव की उत्पत्ति एवं विकास – Origin and Development of Human Being in Hindi

पृथ्वी पर मानव की उत्पत्ति एवं विकास (Origin and Development of Human Being) 

आज से लगभग 450 करोड वर्ष पूर्व पृथ्वी तथा अन्य ग्रहों का अस्तित्व नहीं था। वैज्ञानिकों का ऐसा मत है कि एक विशाल पिण्ड बहुत ही तीव्र गति से अन्तरिक्ष में घूम रहा था। एक प्राकृतिक घटना के परिणामस्वरूप यह पिण्ड किसी दूसरे पिण्ड से टकरा गया।

इस टक्कर के फलस्वरूप यह पिण्ड टुकड़ो में विभाजित हो गया जिससे विभिन्न ग्रहों का निर्माण हुआ। सूर्य, पृथ्वी, मंगल आदि ग्रह इस पिण्ड के टुकड़े थे।

पृथ्वी पर मानव की उत्पत्ति एवं विकास - Origin and Development of Human Being in Hindi

दीर्घकाल तक पृथ्वी आग के गोले के समान धधकती रही, फिर धीरे-धीरे भारी वर्षा, तूफान, बर्फबारी आदि के फलस्वरूप पृथ्वी ठण्डी हुई और उसका वर्तमान स्वरूप अस्तित्व में आया।

वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर जीवों की उत्पत्ति के सम्बन्ध में विकास की निम्न अवस्थाओं का वर्णन किया है-

(1) सूक्ष्म तथा रीढ़ विहीन जीवों की उत्पत्ति (Origin of Small and Spineless Creature)-अधिकांश वैज्ञानिकों का मत है कि आज से लगभग 50 करोड़ वर्ष पूर्व, सर्वप्रथम जल में रहने वाले जीवों का जन्म हुआ। ये जीव अत्यन्त सूक्ष्म थे। इन जीवों में वनस्पति एवं पशु दोनों के सूक्ष्म लक्षण व्याप्त थे। यह एक कोशिकीय थे। इसी प्रकार के अन्य अनेक जीवों का जन्म धीरे-धीरे होता गया।

(2) उभयचर जीवों की उत्पत्ति (Origin of Amphibians)-करोड़ों वर्षों के उपरान्त प्राकृतिक रूप से उभयचर प्राणियों का जन्म होना प्रारम्भ हुआ । इनका बाहरी आवरण अत्यन्त कठोर था। इसमें मुख्य रूप से घोंघे, केकड़े, मेढ़क एवं मछलियों को शामिल किया जाता है। इसके साथ ही दलदली भागों में वनस्पतियों का विकास होना भी प्रारम्भ हो गया। इन दलदली भागों में वाले सरीसृपों का भी जन्म हुआ। ये जीव स्थल एवं जल कुछ रेंगने दोनों स्थानों पर सरलतापूर्वक रह सकते थे। अतः इन्हें उभयचर प्राणी कहा गया है।

(3) अण्डज जीवों की उत्पत्ति (Origin of Oviparous Creatures)-निरन्तर वायुमण्डल में परिवर्तन के स्वरूप ऐसे प्राणियों की उत्पत्ति हुई जिनका जन्म अण्डों तथा बीजों से हुआ था। इनमें मगरमच्छ, सर्प जैसे जीव मुख्य थे ।

(4) नभचर एवं स्तनपायी जीवों की उत्पत्ति (Origin of Avians and Mammals) – समय चक्र एवं ऋतु परिवर्तन के साथ नभचर एवं स्तनपायी जीवों का जन्म हुआ। नभचर के अन्तर्गत आकाश में उड़ने वाले जीवों को सम्मिलित किया जाता है तथा स्तनपायी में नर-वानर (प्राइमेट) को सम्मिलित किया जाता है। जैसे- बन्दर, लंगूर एवं चिम्पैंजी ।

(5) मानव की उत्पत्ति एवं विकास (Origin and Development of Human) – मानव की उत्पत्ति को लेकर विद्वानों में सर्वाधिक मतभेद है। अधिकांश विद्वानों का मत हैं कि नर-वानर (प्राइमेट) से ही आधुनिक मानव का जन्म जो आज से लगभग 5 लाख वर्ष पूर्व हुआ। प्रारम्भ में ये प्राणी सीधे खड़े होकर नहीं चलते थे बल्कि हाथ एवं पैर दोनों की सहायता से चलते थे। इनकी अधिकांश गतिविधियाँ जानवरों के समान थी।

ग्रहों पर जीवन की संभावना (Possibility of Life on Planets) 

आज जब खगोल विज्ञान तेजी से तरक्की कर रहा है और प्रति दिन नए-नए ग्रहों की खोज सामने आ रही है, ऐसे में शायद हमारे लिए सबसे अहम प्रश्न हो कि क्या हम इस ब्रह्माण्ड मे अकेले हैं?

सदियों से इंसान इस सवाल का जवाब खोज रहे हैं लेकिन स्पेस तकनीक के बढ़ते कदमों ने पिछले कुछ दशकों में आसमान के उस पार के अनगिनत जहानों का झरोखा खोला है।

कैपलर एक प्रकार का टेलीस्कोप है जोकि सन् 2009 में लॉच किया गया। इसके द्वारा अंतरिक्ष में पृथ्वी के समान ग्रहों को देखा जाता है। अब तक इसके द्वारा 2700 संभावित ग्रहों को देखा जा चुका है। समस्त संभावित ग्रहों में से कुछ पृथ्वी के समान ही है। इनमें से निम्न ग्रहों पर जीवन के लिए स्थितियों सबसे ज्यादा अनुकूल है-

(1) कैपलर 186 एफ (Kepler 186 F) – यह सौर मंडल के बाहर खोजा गया पहला ऐसा ग्रह था जो अपने सितार से इतनी दूरी पर है कि वैज्ञानिक यहाँ जिंदगी के निशान खोज सकें। कंपलर 186 एफ धरती से 490 प्रकाश वर्ष दूर हैं और धरती से करीब 10 गुना बड़ा है।

(2) ग्लीस 581 जी (Glease 581 G)– प्लीस 581 जी को 2010 में खोजा गया था। चट्टानों से बना ये ग्रह धरती से 20 प्रकाश वर्ष दूर है और धरती से 2-3 तीन गुना बड़ा है। तुला तारामंडल में यह ग्रह 30 दिन में अपने सितारे का चक्कर काटता है।

(3) ग्लीस 667 सीसी (Glease 667 CC)- इस ग्रह को ‘सुपर अर्थ का नाम दिया गया है। वृश्चिक तारामंडल में ये ग्लीस 667 सीसी धरती से सिर्फ 22 प्रकाश वर्ष दूर है। इसका आकार धरती से 415 गुना बड़ा है।

(4) कैपलर 22 बी (Kepler 22B)- कंपलर 22 बी धरती से 600 प्रकाश वर्ष दूर है। आकार में धरती से 215 गुना बड़ा होने के बावजूद इस ग्रह पर धरती की तरह ग्रीनहाउस इफेक्ट है। वैज्ञानिकों के मुताबिक कंपलर 22 बी का औसत तापमान 22. डिग्री सेल्सियस है जो जीवन के अनुकूल है। इस ग्रह का सितारा भी सूर्य से काफी मिलता-जुलता है।

(5) एचडी 40307 (HD 40307) – पिक्टोर नाम के तारामंडल में स्थित एचडी 40307 धरती से 22 प्रकाश वर्ष दूर है। जल्द ही ऐसे टेलीस्कोप उपलब्ध होंगे जो इस ग्रह की सतह को देख पाएंगे। यह ग्रह अपने सितारे से करीब करीब 9 करोड़ किलोमीटर दूर है। यह धरती और सूर्य के बीच की दूरी का लगभग आधा है।

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