भोजन में सब्जियों तथा फल की उपयोगिता

 सब्जियाँ

फल तथा सब्जियों का मानव आहार में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है । फल तथा सब्जियाँ ही ऐसे स्रोत हैं जिनके द्वारा आहार में विटामिन ‘सी’ तथा ‘बी काम्पलेक्स’ की प्राप्ति होती है। सलाद के रूप में सब्जियाँ एवं फल भोजन के साथ ग्रहण किये जाते हैं तथा उनको पकाना भी आवश्यक नहीं है। सब्जियों का उपयोग मुख्यतः विटामिन तथा खनिज लवण की प्राप्ति के लिये किया जाता है।

खाद तथा उर्वरकों का महत्व और वर्गीकरण

प्रतिदिन आहार में फल तथा सब्जियों का सेवन आवश्यक होता है। भोज्य पदार्थ पकाने से इसमें पाये जाने वाले कुछ पौष्टिक तत्त्व एकदम नष्ट हो जाते हैं । अतः यदि आहार में कच्चे फल एवं सब्जियाँ न ली जाएँ तो उन पौष्टिक तत्त्वों की कमी हो जाती है। मौसम के फल तथा सब्जियाँ सस्ते होते हैं तथा अधिक फल व सब्जियों का उपयोग करके अनाज की बचत की जा सकती है और आहार में श्वेतसार की मात्रा भी कम की जा सकती है। विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ बनाकर आहार को आकर्षक, स्वादिष्ट, पौष्टिक व सुपाच्य बनाया जा सकता है।

सब्जियों के उत्पादन में कम स्थान तथा अधिक पानी की आवश्यकता होती है तथा इनसे महत्त्वपूर्ण पौष्टिक तत्त्व आसानी से प्राप्त हो सकते हैं। सभी सब्जियों को मुख्यतः तीन भागों में बाँट सकते हैं-

1.शर्करा युक्त सब्जियाँ—आहार में कैलोरी, कैल्शियम, आयरन, कैरोटीन तथा रीबोफ्लेविन की कमी को पूरा करने के लिए अधिक से अधिक सब्जियों का प्रयोग करना आवश्यक है। आलू, शकरकन्द, केला, जिमीकन्द आदि से कैलोरी प्राप्त होती है। हरे पत्ते वाली सब्जियों से अधिक मात्रा में विटामिन तथा खनिज लवण प्राप्त होते हैं।

जड़कन्द में आने वाली सब्जियाँ; जैसे आलू, जिमीकन्द, अरबी, शकरकन्दी आदि से अधिक मात्रा में कैलोरी मिलती है। संसार के समस्त देशों के लोग अपने प्रतिदिन के आहार में औसत 299 जड़कन्द का सेवन करते हैं। इस प्रकार से प्रतिदिन की पूरी कैलोरी का 10% लाभ जड़ एवं कन्द से ही लेते हैं। जिमीकन्द में कैलोरीज के अतिरिक्त अन्य पौष्टिक तत्त्व भी पाये जाते हैं। इसमें कैल्शियम तथा रीबोफ्लेविन भी पाया जाता है । जिमीकन्द को भी अन्य जड़कन्द की तरह आहार में विभिन्न व्यंजन के रूप में लेते हैं।

उदाहरण– कटलेट, पराँठा, कचौड़ी तथा समोसे आदि ।

2. हरे पत्ते वाली सब्जियाँ—हरी पत्ते वाली सब्जियों में कैरोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है। कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन ‘ए’ में परिवर्तित हो जाता है, जो कि नेत्रों की रोशनी के लिए अत्यन्त आवश्यक है। हरे पत्ते वाली सब्जियों में कैरोटीन के अतिरिक्त अन्य पौष्टिक तत्त्व; 

उदाहरणार्थ– कैल्शियम, आयरन, विटामिन बी काम्पलेक्स भी अधिक मात्रा में पाया जाता है । प्रतिदिन आहार में यदि रोटी या पराँठे में हरे पत्ते वाली सब्जियाँ मिलाकर उनका सेवन किया जाए तो पौष्टिक तत्त्वों का स्तर बढ़ जाता है । कच्ची हरी सब्जियों में विटामिन ‘सी’ अधिक मात्रा में पाया जाता है, परन्तु उनके पकाने तथा तलने से अधिकांश विटामिन नष्ट हो जाते हैं । अतः प्रतिदिन के आहार में हमको अधिक से अधिक कच्ची सब्जियों का सेवन करना चाहिए जिससे विटामिन ‘सी’ एवं विटामिन ‘बी काम्प्लेक्स’ की कमी को पूरा किया जा सके ।

3. अन्य सब्जियाँ– कन्दमूल, हरे पत्ते वाली सब्जियों के अतिरिक्त कुछ अन्य भी सब्जियाँ आहार के रूप में ली जाती हैं जिनमें सभी पौष्टिक तत्त्व थोड़ी मात्रा में उपस्थित रहते हैं । परन्तु हम उनमें से किसी को भी एक मुख्य पौष्टिक तत्त्व का स्रोत नहीं कह सकते। इन सब्जियों में मुख्यतः तोरई, परवल तथा लोकी आदि हैं। इनमें सोडियम कम मात्रा में पाया जाता है, अतः इन सब्जियों को उन मरीजों को अधिक दिया जाता है, जिनको आहार में इनका कम सेवन करने के लिए कहा जाता है।

फल(Fruit)

प्राचीन समय में जब मनुष्य जंगलों में रहता था, उसको भोज्य पदार्थों के बारे में ज्ञान न था । वे अपनी क्षुधा शान्त करने के लिए जंगली कंदमूल का प्रयोग करते थे। सभ्यता के विकास के साथ-साथ उसके आहार में भी सुधार होता गया । कृषि-प्रधान काल में अनेक पेड़-पौधों की खेती की जाने लगी। आधुनिक युग में फलों के पौष्टिक मूल्यों पर अनेक प्रयोग हुए हैं और मानव आहार में उनकी उपयोगिता को भली-भाँति समझा गया। आहार सूची बनाते समय फल को उचित स्थान प्रदान किया जाता है । आजकल हमारे देश में भी फलों का उत्पादन बढ़ गया है। हर शहर में कुछ विशेष फल उत्पादित किये जाते हैं। संसार के समस्त देशों में फलों का प्रयोग व्यापक रूप से किया जाता है। फलों का रस निकालकर तथा उसे संरक्षित करके उसका पेय-पदार्थों के रूप में सेवन किया जाता है।

साधारणतः किसी भी पौधे का बीजयुक्त भाग फल कहलाता है। फल का विकास पौधे के फूल से होता है । फल गूदेदार एवं रसयुक्त भोज्य पदार्थ हैं। फलों का प्रयोग विटामिन, खनिज लवण, कार्बोज, सुगन्ध तथा स्वाद के लिए किया जाता है। इसमें जल की भी अधिकता होती है। प्रत्येक फल में एक आवरण होता है जिसे फलभित्ति (Pericarp) कहते हैं। फलभित्ति मोटी या पतली हो सकती है। मोटी भित्ति में प्रायः तीन पर्त रहती हैं । बाहरी पर्त को बाह्यफलभित्ति (Epicarp), बीच की पर्त को मध्यफलभित्ति (Mesocarp) और सबसे अन्दर वाली पर्त को अन्तः फलभित्ति (Endocarp) कहते हैं।

फलों का पौष्टिक मूल्यांकन

फलों में भोजनीय एवं अभोजनीय दोनों प्रकार के पदार्थों की फलों में मात्रा बदलती रहती है। कुछ फल में अभोजनीय पदार्थ अधिक होते हैं तथा कुछ में भोजनीय। फलों में उपस्थित छिलका एवं बीज उसका अभोजनीय भाग है। कई फलों में छिलका मोटा होता है, जिसका उपयोग आहार में हम नहीं कर पाते । अनन्नास का बाहरी आवरण अत्यन्त मोटा होता है, जिसको काटकर निकालना अति आवश्यक है। विभिन्न फलों में 3 से 39% तक अभोजनीय भाग होता है।

फलों में शर्करा की अधिकता होती है । किसी-किसी फल में प्रोटीन तथा वसा भी उपस्थित रहते हैं । जैसे केले में 4% प्रोटीन, 5% वसा तथा 20% श्वेतसार होता है। सभी सरस एवं शर्करायुक्त फल ऊर्जा के उत्तम साधन होते हैं। केला तथा अनन्नास कार्बोज के उत्तम साधन हैं । कच्चा फल कड़ा और अम्ल युक्त होता है। फल कच्चा खाने से पाचन शक्ति खराब हो जाती है। अधिक पका फल भी प्रयोग में नहीं लाना चाहिए, क्योंकि पकने के बाद फल सड़ने लगता है। अतः कच्चा और अधिक पका फल दोनों ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। जब फल पक जाता है, तो उसमें उपस्थित स्टार्च, शर्करा में बदल जाता है। फलों में मिठास शर्करा के कारण होती है ।

ताजे फलों में विटामिन ‘सी’ अधिक मात्रा में रहता है, अतः ये विटामिन ‘सी’ के सर्वोत्तम साधन माने जाते हैं। पकाने की क्रिया तथा फलों का संग्रह करने की विधियों से उसमें उपस्थित विटामिन ‘सी’ की काफी मात्रा नष्ट हो जाती है। नीबू, आँवला, नारंगी, संतरे, अमरूद, बेर आदि विटामिन ‘सी’ के उत्तम साधन हैं। विटामिन ‘सी’ युक्त फलों का सेवन करने से ‘स्कर्वी’ रोग नहीं होता । फलों अन्य अम्ल जैसे ऑक्जेलिक एसिड, स्टिरिक एसिड, टार्टरिक एसिड और मैलिक एसिड भी पाये जाते हैं, ये अम्ल फलों को खटास प्रदान करते हैं ।

फलों में थायमिन तथा रीबोफ्लेविन की भी अधिकता होती है। ये दोनों अधिकतर फलों के बाहरी छिलके में उपस्थित रहते हैं ।

पीले फलों में कैरोटीन उपस्थित रहता है, इससे विटामिन ‘ए’ का निर्माण होता है । आम तथा सन्तरे में कैरोटीन की अधिकता होती है ।

फलों में विटामिन ‘डी’ की कमी होती है। फलों में कैल्शियम की कमी होती है । परन्तु कुछ फलों में; 

जैसे—सन्तरा, नीबू, नारंगी, अंजीर, अंगूर में कैल्शियम अधिक मात्रा में उपस्थित रहता है। इन फलों में लौह लवण भी उपस्थित रहता है ।

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