Skip to content

surya grahan 2026 why tulsi and ganga jal are used


साल 2026 का पहला सूर्यग्रहण 17 फरवरी यानी आज लग रहा  है। वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्यग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, यह तब घटित होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। इस वर्ष का यह पहला सूर्यग्रहण कई कारणों से विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इस समय सूर्य के साथ चार अन्य ग्रह भी कुंभ राशि में स्थित रहेंगे, जिससे इसकी ज्योतिषीय महत्ता और बढ़ जाएगी। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण काल के समय में तुलसी समेत 4 चीजों का प्रयोग किया जाता है। आइए आपको बताते हैं किन-किन चीजों का प्रयोग किया जाता है।

गंगाजल कर सकते हैं प्रयोग

सूर्य ग्रहण के दौरान आप गंगाजल का इस्तेमाल कर सकती हैं। हिंदू धर्म में गंगाजल को पवित्र माना जाता है और यह इस दौरान दूषित नहीं होता है।  इस दिन आप गंगाजल से जुड़ा उपाय कर सकते हैं। इसके लिए आप एक रुपये का सिक्का पूजा स्थल पर रख दें। जब ग्रहण खत्म हो जाए तो इस सिक्के को गंगाजल से धोकर इसे एक लाल रंग के वस्त्र में बांधकर तिजोरी में रखें।

ग्रहण के समय जौ का करें प्रयोग

सूर्य ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने के लिए आप जौ का प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए जौ को अपनी जेब में रखना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण के दौरान जौ संबंधित उपाय करने से मंगल ग्रह की अशुभता को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

तुलसी का करें प्रयोग

तुलसी को भी हिंदू धर्म पवित्र और पूजनीय माना गया है। ग्रहण काल के दौरान खाने पीने की वस्तु को शुद्ध बनाए रखने के लिए तुलसी का इस्तेमाल कर सकते हैं। ग्रहण के समय आप भोजन, जल, दूध आदि में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए। ऐसा करने से सूर्य ग्रहण का छाया और प्रभाव भोजन पर कम रहता है। माता तुलसी नकारात्मकता को दूर करती हैं। 

काले तिल का करें इस्तेमाल

ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा सामान्य दिनों से अधिक सक्रिय रहती हैं। इसलिए ग्रहण के समय में बुरे प्रभाव को कम करने के लिए दान-पुण्य के कार्य जरुर करें। इसके लिए सूर्य ग्रहण शुरु होने से पहले तिल, काले वस्त्र आदि का दान करें। जब ग्रहण समाप्त हो जाए, तो स्नान के बाद काले तिल को आप दान में दे सकते हैं। इस उपाय से राहु-केतु शांत होते हैं। 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *