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hanuman jayanti 2026 puja auspicious afternoon and evening times


आज पूरे देश में हनुमान जन्मोत्सव का पावन पर्व बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। चैत्र पूर्णिमा के शुभ अवसर पर भक्त अपने आराध्य बजरंगबली की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। बजरंगबली को साहस, शक्ति और अटूट भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस विशेष दिन पर ग्रहों के शुभ संयोग और विशेष मुहूर्तों का मेल बन रहा है, जो विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्तों के लिए सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति के द्वार खोलता है।

पूजा के तीन शुभ मुहूर्त

आज पूजा के लिए तीन मुख्य मुहूर्त बहुत शुभ हैं। पहला सुबह का समय, जो 6:10 AM से 7:44 AM तक है। दूसरा दोपहर का समय (अभिजीत मुहूर्त), जो 12:00 PM से 12:50 PM तक है। तीसरा शाम का समय, जो 6:39 PM से 8:06 PM तक है।

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इस मंत्र का करें जाप

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन हनुमान जी की पूजा करने से डर और परेशानियां दूर होती हैं। इससे शनि दोष से भी राहत मिलती है। आज ‘ॐ हनुमते नमः’ मंत्र का जाप करना और हनुमान चालीसा पढ़ना बहुत अच्छा होता है। अगर मुमकिन हो, तो हनुमान चालीसा का 7 या 11 बार पाठ करें, यह बहुत फलदायी माना जाता है।

आज के शुभ योग

आज के दिन ‘ध्रुव योग’ और ‘हस्त नक्षत्र’ का खास मेल बन रहा है। ध्रुव योग दोपहर 2:20 तक रहेगा, जिसके बाद ‘व्याघात योग’ शुरू होगा। साथ ही, शाम 5:38 तक हस्त नक्षत्र रहेगा और फिर ‘चित्रा नक्षत्र’ लग जाएगा। इन योगों में पूजा करना बहुत शुभ होता है।

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हनुमान जयंती की पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजा घर में दीपक और अगरबत्ती जलाएं। हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाना बहुत शुभ होता है। उन्हें लाल फूल, गुड़-चना, बेसन के लड्डू या केले का भोग लगाएं। इसके बाद हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें और अंत में आरती करें। आज व्रत रखना और गरीबों को दान देना भी बहुत अच्छा माना जाता है।

परेशानियों को दूर करने के उपाय

जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए मंदिर जाकर हनुमान जी को चोला चढ़ाएं और 11 बार हनुमान चालीसा पढ़ें। गुड़-चने का दान करें और 108 बार ‘राम’ नाम का जाप करें। अगर आपकी कुंडली में शनि या मंगल की समस्या है, तो हनुमान जी की पूजा से बहुत लाभ मिलता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

विशेष मंत्र

पूजा के दौरान आप इस मंत्र का जाप कर सकते हैं, “मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥” इसके अलावा हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करना भी श्रेष्ठ है।



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